हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन अली मुतहरी सद्र ने तबरेज़ में हौज़ा न्यूज़ के संवाददाता से बातचीत करते हुए कहा कि हौज़ा इल्मिया की तब्लीग़ी ज़िम्मेदारी बहुत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा, “अय्याम-ए-फ़ातिमिया के दौरान हमारी प्राथमिकता यह है कि छात्र और शिक्षक तब्लीग़ के मैदान में प्रभावी भूमिका निभाएँ और अहलेबैत (अ.स.) का संदेश लोगों तक पहुँचाएँ। ये दिन धार्मिक शिक्षाओं को स्पष्ट करने, आस्थागत विश्वासों को मज़बूत करने और हौज़ा ए इल्मिया तथा आम जनता के बीच निकट संबंध स्थापित करने का एक मूल्यवान अवसर हैं। इसलिए जिन लोगों में इस क्षेत्र में काम करने की क्षमता और तैयारी है, उन्हें इस अवसर से लाभ उठाना चाहिए।
उन्होंने छात्रों और शिक्षकों से अपील की कि वे अपनी क्षमता और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तब्लीग़ के लिए योजना बनाएँ और इस महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी को गंभीरता से निभाएँ।
हौज़ा ए इल्मिया के प्रमुख ने स्पष्ट किया कि हौज़ा इल्मिया केवल शिक्षा प्राप्त करने और पढ़ाई करने का केंद्र नहीं है, बल्कि वहाँ प्राप्त ज्ञान का लाभ तब्लीग़, मार्गदर्शन और जनता की सेवा के रूप में भी सामने आना चाहिए।
उन्होंने छात्रों और शिक्षकों की अलग-अलग परिस्थितियों पर ध्यान देने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि कुछ छात्रों या शिक्षकों के लिए विभिन्न कारणों से तब्लीग़ी यात्रा पर जाना संभव नहीं हो सकता। कुछ को तब्लीग़ के लिए उचित स्थान नहीं मिल पाता या उनके पास इस कार्य में भाग लेने के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ उपलब्ध नहीं होतीं। ऐसे मामलों में उनकी पढ़ाई और शैक्षणिक गतिविधियों को रोकना नहीं चाहिए, बल्कि उन्हें पूरी गंभीरता के साथ अपनी वैज्ञानिक और शैक्षणिक गतिविधियाँ जारी रखनी चाहिए।
हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन अली मुतहरी सद्र ने तब्लीग़ और शिक्षा के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए किए गए उपायों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रांत के सभी मदरसों के प्रबंधकों को निर्देश दिया गया है कि वे इच्छुक छात्रों और शिक्षकों के लिए तब्लीग़ में भाग लेने की परिस्थितियाँ उपलब्ध कराएँ। साथ ही, जिन लोगों के लिए तब्लीग़ में जाना संभव नहीं है, उनकी पढ़ाई जारी रखने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने आगे कहा कि यदि अय्याम-ए-फ़ातिमिया के दौरान किसी शिक्षक को तब्लीग़ के लिए भेजा जाता है, तो पहले से समन्वय स्थापित करके उसकी कक्षा किसी दूसरे शिक्षक के माध्यम से या ऑनलाइन आयोजित की जानी चाहिए। इससे एक ओर शिक्षक की तब्लीग़ी क्षमता का लाभ उठाया जा सकेगा और दूसरी ओर छात्रों की पढ़ाई में कोई बाधा नहीं आएगी।
अंत में हौज़ा ए इल्मिया के प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा कि हमारी नीति शिक्षा की रक्षा करते हुए तब्लीग़ को प्रोत्साहित करना और उसके रास्ते आसान बनाना है। न तो तब्लीग़ के बहाने पढ़ाई बंद होनी चाहिए और न ही शैक्षणिक कार्यक्रमों के कारण तब्लीग़ के अवसर सीमित किए जाने चाहिए।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि छात्र और शिक्षक अपनी क्षमता तथा परिस्थितियों के अनुसार हौज़ा इल्मिया की तब्लीग़ी ज़िम्मेदारी को मज़बूत बनाने में योगदान देंगे और मदरसों के प्रबंधक उचित योजना एवं दूरदर्शिता के साथ हौज़ा इल्मिया के दोनों महत्वपूर्ण उद्देश्यों शिक्षा और तब्लीग को पूरा करने की व्यवस्था करेंगे।
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